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“दैनिक प्रश्न”: कृपया इस कविता के रचयिता, इसके लेखन का समय एवं स्थान बताइए। सही उत्तर देने पर +2 अंक, और बेहतरीन टिप्पणी देने पर फूल भी दिए जाएंगे।

2016-06-01View Original

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चिन्युआन चुन – चांगशा
अकेले, ठंडी शरद ऋतु में… शियांग नदी उत्तर की ओर बह रही है… संतरे के पेड़ों वाला द्वीप।     देखिए, हजारों पहाड़ लाल रंग से रंगे हुए हैं; सभी ; नदी का पानी बहुत ही स्वच्छ है; सैकड़ों नावें उसमें     बाज़ आकाश में उड़ता है, मछलियाँ पानी की सतह पर तैरती हैं… हर प्राणी अपनी स्वतंत्रता में जीता है     विशाल एवं निर्जन प्रकृति को देखकर सोचता हूँ… आखिर इस दुनिया पर कौन शासन करत     सैकड़ों साथियों के साथ वहाँ घूमा,
पुराने, यादगार दिनों की यादें आती हैं।     वही सहपाठी, जवानी की चरम अवस्था में। ; विद्वानों का अहंकार, अत्यधिक होता है।     देश-काल के बारे में विचार व्यक्त करना, शब्दों से प्रेरणा देना… पहले के उन शक्तिशाली लोगों को तो     क्या आपको याद है, जब हम मध्य धारा में नाव चला रहे थे, और लहरें हमारी नाव को रो
Reply #22016-06-01
दिसंबर 1925, * , चांगशा
Reply #32016-06-01
*1925/12, चांगशा
Reply #42016-06-02
*वर्ष 1925 की शरद ऋतु में, चांगशा से होते हुए।
Reply #52016-06-02
“चिन्युआन चुन·चांगशा” ऐसी ही एक कविता है। यह 1925 की शरद ऋतु में, 32 वर्ष की आयु में लिखी गई। उस समय वह अपने गृहनगर शाओशान से निकलकर गुआंगझोउ जा रहा था, ताकि वहाँ किसान आंदोलनों का नेतृत्व कर सके। रास्ते में उसने चांगशा का दौरा किया। चांगशा के शरद ऋतु के दृश्यों एवं अपने युवावस्था में हुए क्रांतिकारी संघर्षों की यादों के माध्यम से उसने क्रांतिकारी युवाओं की भावनाओं को व्यक्त किया। उसने दुनिया को अपनी जिम्मेदारी मानने, प्रतिक्रियावादी शासकों को तिरस्कार करने, एवं पुराने चीन को बदलने की इच्छा को भी व्यक्त किया।
Reply #62016-06-02
“चिन्युआन चुन·चांगशा” ऐसी ही एक कविता है। यह कविता 1925 की शरद ऋतु में, 32 वर्ष की आयु में लिखी गई। उस समय वह अपने गृहनगर शाओशान से निकलकर गुआंगझोउ जा रहा था, ताकि वहाँ किसान आंदोलनों से संबंधित कार्यक्रमों का संचालन कर सके। रास्ते में उसने चांगशा का दौरा किया। चांगशा के शरद ऋतु के दृश्यों एवं अपने युवावस्था में हुए क्रांतिकारी संघर्षों की यादों के माध्यम से उसने क्रांतिकारी युवाओं की भावनाओं को व्यक्त किया। उसने दुनिया को अपनी जिम्मेदारी मानने, प्रतिक्रियावादी शासकों को तिरस्कार करने, एवं पुराने चीन को बदलने की इच्छा को भी व्यक्त किया। वर्ष 1925 की शरद ऋतु में, हुनान प्रांत के गवर्नर झाओ हेंगटी ने उसे फिर से गिरफ्तार करने हेतु आदेश जारी क माओ चांगशा से गुआंगझोउ जा रहे थे; यह कविता शायद चांगशा छोड़ते समय ही लिखी गई होगी।
Reply #72016-06-02
“चिन्युआन चुन·चांगशा” ऐसी ही एक कविता है। यह 1925 की शरद ऋतु में, 32 वर्ष की आयु में लिखी गई। उस समय वह अपने गृहनगर शाओशान से निकलकर गुआंगझोउ जा रहा था, ताकि वहाँ किसान आंदोलनों का नेतृत्व कर सके। रास्ते में उसने चांगशा का दौरा किया। चांगशा के शरद ऋतु के दृश्यों एवं अपने युवावस्था में हुए क्रांतिकारी संघर्षों की यादों के माध्यम से उसने क्रांतिकारी युवाओं की भावनाओं को व्यक्त किया। उसने दुनिया को अपनी जिम्मेदारी मानने, प्रतिक्रियावादी शासकों को तिरस्कार करने, एवं पुराने चीन को बदलने की इच्छा को भी व्यक्त किया।

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