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पिछले साल पुनरावृत्ति करने का समय था, लेकिन परीक्षा ही नहीं हुई। इस साल परीक्षा हो सकती है, लेकिन पुनरावृत्ति करने का समय ही नहीं है। अब परीक्षा में दो महीने ही शेष हैं। अब तो केवल रात एवं सप्ताहांत में ही पढ़ने का समय मिल रहा है। कृपया, जानकार लोगों से पूछना चाहता हूँ कि सीमित समय में पढ़ने हेतु कौन-सा तरीका सबसे प्रभावी है? मैंने कई लोगों से पूछा, कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित संस्थानों की पाठ्यपुस्तकों एवं प्रश्नसंग्रहों पर ही ध्यान देना चाहिए, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि टियानडा विश्वविद्यालय की पाठ्यपुस्तकों पर ही ध्यान देना चाहिए। अब स्थिति बहुत ही उलझी हुई है… इतने कम समय में सब कुछ ध्यान से पढ़ना असंभव है। आप लोग कैसे पढ़ते हैं? :चक्कर आना:
सबसे पहले यह बता दूँ कि मेरे पास भी पिछले साल परीक्षा देने का समय नहीं था, जबकि इस साल परीक्षा है लेकिन समय नहीं है। लेकिन मेरे विचार से, चाहे कोई भी पुस्तक हो, उसमें दी गई जानकारी तो एक ही होती है; जो भी पुस्तक हो, उससे परीक्षा पास की जा सकती है। दोनों ही पुस्तकों में दी गई जानकारी समान ही है। “टियानदा” पुस्तक में विषयों की व्याख्या स्पष्ट है, लेकिन यह तो बस एक पाठ्यपुस्तक ही है; इसमें दिए गए उदाहरणों के आधार पर ही अभ्यास करना होगा। वहीं, संघ द्वारा दी गई पुस्तकों में दिए गए उदाहरण अधिक उपयोगी हैं, लेकिन उनमें कुछ अनावश्यक चीजें भी हैं। मेरी सलाह यह है कि चूँकि पिछले साल ही आपको कुछ ज्ञान प्राप्त हो चुका है, इसलिए 2 महीने के समय में केवल एक ही पुस्तक पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। पाठ्यपुस्तक को संक्षेप में ही पढ़ें, और महत्वपूर्ण विषयों पर अधिक ध्यान देकर अधिक से अधिक प्रश्न हल करें… वास्तविक परीक्षा के प्रश्न भी हल करें! केवल संदर्भ हेतु! कोई सफलता का अनुभव नहीं है!
काम करने के बाद व्यवस्थित रूप से सीखना काफी मुश्किल होता है। परों वर्ष जब मैंने बुनियादी ज्ञान हासिल किया, तो मैंने वास्तविक प्रश्नों को हल करके ही विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस वर्ष भी मैं ऐसा ही करने वाला हूँ… दो पाठ्यपुस्तकों को मिलाकर ही पढ़ूँगा। उम्मीद है कि यह आपकी मदद कर पाएगा।
मैंने अब निर्णय ले लिया है – दिन के समय कार्यस्थल पर ही जहाँ भी समय मिले, टियानदा संबंधी सामग्री पढ़ूँगा; रात में एवं सप्ताहांत में घर जाकर संबंधित संस्थाओं से जुड़ी सामग्री पढ़ूँगा। बचे हुए समय में वास्तविक परीक्षा-प्रश्नों प :लोल