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इतनी मेहनत से तैयारी की, शुरू में तो बहुत आत्मविश्वास था, लेकिन जिंदगी हमेशा ही हमें कुछ अप्रत्याशित “झटके” देती है। आज मुझे अचानक पता चला कि प्रश्नों के उत्तरों को परीक्षा-पत्र में दिए गए कोष्ठकों में ही लिखना होता है… यह तो वाकई एक बड़ा झटका था! मैंने तो सीधे ही उत्तरों को प्रश्न-संख्याओं के बगल में ही लिख दिया… मुझे तो कोष्ठकों का कोई ध्यान ही नहीं रहा… मैंने तो बस प्रश्न पढ़कर ही उत्तर लिख दिया। परीक्षा देखने वाले शिक्षक ने प्रश्नपत्र देर से ही दिए। दूसरी बार अलार्म भी बज चुका था, लेकिन मैं अभी तक अपने परीक्षा-पत्र पर अपना नंबर भी नहीं लिख पाया था। ऐसे में परीक्षा संबंधी निर्देशों को पढ़ने का समय ही कहाँ था? फिर, शानडोंग की ओर से जारी किए गए परीक्षा-पत्रों पर भी वाकई में यह जानकारी लिखी ही नहीं है। मन बेचैन है, भाषा भी सही से नहीं आ रही है… फिर भी, कृपया इसे देख ही लें। वैसे, कितने लोगों का नाम कोष्ठकों में लिखा ही नहीं गया है?
:हैंडशेक – एक-दूसरे की पीड़ा को समझना।
पिछले दो दिनों से मुझे पूरी तरह से बुरा लग रहा है। नींद एवं भोजन लेने में कठिनाई हो र
किसी पर दोष देने की बात ही नहीं है… बस ऐसा लगता है कि छोटी-छोटी नालियों में नावें उलट जाती हैं… फिर, सभी परीक्षा-पत्र तो “चाइनीज़ पर्सनल एग्जामिनेशन वेबसाइट” से ही जारी किए गए हैं… तो फिर कुछ क्षेत्रों में तो यह जानकारी लिखी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में नहीं। यह तो स्वाभाविक रूप से ही अनुचित है।
मेरे कुछ सहकर्मी ऐसे हैं, जिन्होंने पहले आवेदन ही नहीं किया, और फिर उनका भाग्य पर ही निर्भर करता है! चिंता करने की कोई आवश्यकता
ठीक है। अब परेशान न हों। भाग्य पर निर्भर करता है। 0 अंक मिलने की स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें; फिर ही लॉटरी खरीदें। :हाहा
विचार करने की आवश्यकता है! हालाँकि, शानडोंग के परीक्षा-पत्रों पर यह जानकारी वाकई में नहीं लिखी गई है; कुछ क्षेत्रों में तो यह जानकारी लिखी गई है।
मैंने अपनी दूसरी सुबह के बारे में भी कुछ नहीं लिखा… अरे, यह तो नियति ही है! :'(