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क्रेनों की विद्युत प्रणाली में ज्यादातर स्थानों पर तारों एवं केबलों का ही उपयोग किया जाता है; जबकि ब्रिज-टाइप क्रेनों जैसी ऐसी क्रेनों में, जिन्हें विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उनमें उचित विद्युत केबल लगाए जाते हैं। जब क्रेन में उपयोग होने वाले केबलों में निम्नलिखित समस्याएँ आ जाती हैं, तो इसके कारण क्रेन काम नहीं कर पाती, या उसमें लगे विद्युत उपकरण भी काम नहीं कर पाते। गंभीर स्थिति में ऐसी स्थितियों से विद्युत शॉक या आग लगने का खतरा भी होता है। 1. यांत्रिक क्षति: क्रेनों में प्रयोग होने वाले वायरों एवं केबलों में गंभीर क्षय, थकान, चोट आदि समस्याएँ होने के कारण केबलों में खराबी आ जाती है। ; 2. इन्सुलेशन क्षति: कुछ कारणों के कारण क्रेन में उपयोग होने वाले केबलों की इन्सुलेशन पर्दा क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ; 3. इन्सुलेशन में नमी: इसका अर्थ है, क्रेन में उपयोग होने वाले केबलों में नमी आदि के कारण इन्सुलेशन परत टूट जाती है, जिससे केबल के केंद्रीय धातु भाग सीधे आपस में संपर्क में आ जाते हैं; इसी कारण खराबी उत्पन्न होती है। ; 4. ओवरवोल्टेज: यह क्रेन की विद्युत प्रणाली से संबंधित सामान्य समस्याओं में से एक है; इसके कई कारण हो सकते हैं। ; 5. अतिताप: केवल केबल के तापमान को हाथ से महसूस करके ही इसका पता लिया जा सकता है। ओवरवोल्टेज, ओवरकरंट जैसी समस्याओं के कारण केबल अतितापित हो सकता है; इसके परिणामस्वरूप क्रेन या उसके घटकों में खराबी आ सकती है, जिससे वे सही ढंग से काम नहीं कर पाएंगे, और उनका उपयोगी जीवनकाल भी कम हो सकता है।
सीख लिया! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !