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इस पोस्ट को अंतिम बार hanyu*a8 द्वारा 2015-10-11 20:59 पर संपादित किया गया। उच्च तापमान वाले कार्यक्षेत्रों में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण ( ) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा स्रोतों को जहाँ संभव हो, गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना चाहिए। A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
C, B, ––––––––––––––––––––––––––––––––––––––
पहले खाली स्थान पर D, 45℃; दूसरे खाली स्थान पर B, हवा की दिशा में।
डी 45° बी – हवा की विपरीत दिशा में, सी
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) 45° से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के विपरीत दिशा में ही रखना चाहिए।
डी.बी~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) 45° से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के विपरीत दिशा में ही रखना चाहिए।
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) 45° से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के विपरीत दिशा में ही रखना चाहिए।
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (A) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (A) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण (D) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा-स्रोतों को यथासंभव ग्रीष्मकाल में प्रचलित हवा की दिशा में ही रखना A. हवा की दिशा में B. हवा की विपरीत दिशा में C. 90° D. 45°
उच्च तापमान वाले कार्यशालाओं में, ऊर्ध्वाधर अक्ष एवं गर्मियों में प्रचलित हवा की दिशा के बीच का कोण ( ) से अधिक होता है; इसलिए ऊष्मा स्रोतों को जहाँ संभव हो, गर्मियों में प्रचलित हवा की A. हवा की दिशा में B. हवा के विपरीत दिशा में C. 90° D. 45° C B