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कितने लोगों को पता ही नहीं है कि आज कौन-सा महीना एवं कौन-सी तारीख है… कितने लोगों को यह भी पता नहीं है कि आज कौन-सा दिन है। चूँकि उन्हें तारीखों का पता ही नहीं है, इसलिए घर में रखे गए मीठे पकवान भी कोई खास बात नहीं लगते। चूँकि उन्हें दिन का पता ही नहीं है, इसलिए जब पत्नी पूछती है कि कल कहाँ जाएं, तो मुझे आश्चर्य होता है… क्योंकि हम तो दिन-रात काम करने वाले मजदूर ही हैं! इतना ही लिखूँगा, आप लोग जवाब देते रहें… कोशिश करके एक कविता बनाने की कोशिश करें।
शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में जैविक घड़ी में गंभीर विकार हो दिन की शिफ्ट एवं रात की शिफ्ट – दोनों ही स्थितिय
शिफ्टों में काम करना… इसके बारे में नहीं जानने पर तो कुछ पता ही नहीं चलता, लेकिन “अंकल, आप तो बहुत ही युवा दिख रहे हैं… आप क्या काम करते हैं? ”। “उम्म, मेरी उम्र इस साल 30 साल है। मैं शिफ्ट-आधार पर काम करने वाला कर”
यह तो सही है… देखने में तो यह अपनी उम्र के अन्य लोगों की तुलना में ब
जब बच्चा स्कूल जाने लगेगा, तब उसे पता चल जाएगा कि हर दिन कौन-सा दिन है।
अस्पष्टता में ही वर्ष बीत जाते हैं। । । । । । । । । । । । ।
मुझे हर दिन पता होता है कि आज कौन-सा दिन है। क्योंकि सोमवार से ही मैं वीकेंड का इंतज़ार करने लगता हूँ… और जब वीकेंड आता है, तो मैं यही सोचता रहता हूँ कि काश यह समय धीरे-धीरे बीते… और सोमवार थोड़ा देर से आए।
जिनकी शिफ्टें नहीं हैं, उनके साथ भी वैसा ही है… जब काम बढ़ जाता है, तो ऐसी बातों की परवाह ही नहीं रह जाती।
सोमवार से ही इंतज़ार कर रहा हूँ। सोमवार से बुधवार तक का समय सबसे कष्टदायक लगता है।
सोमवार से शुक्रवार तक का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता ही जाता है, लेकिन शुक्रवार को काम समाप्त होते ही वह दर्द खुशी में बदल जाता है।