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निर्णय: श्रृंखला-फ्री रेडिकलों के सक्रियता खोकर स्थिर पॉलिमर अणुओं का निर्माण होने की प्रक्रिया को “श्रृंखला-समापन अभिक्रिया” कहा जाता है। जब दो साइक्लिक रैडिकल आपस में मिलते हैं, तो उनका विघटन “कपलिंग टर्मिनेशन” एवं “डिवर्जेंट टर्मिनेशन” नामक तरीकों से होता है। ( )
श्रृंखला-रेडिकलों के सक्रियता खो देने एवं स्थिर पॉलिमर अणुओं के निर्माण होने की प्रक्रिया को “श्रृंखला-समापन अभिक्रिया” कहा जाता है। जब दो साइक्लिक रैडिकल आपस में मिलते हैं, तो उनका विघटन “कपलिंग टर्मिनेशन” एवं “डिवर्जेंट टर्मिनेशन” नामक तरीकों से होता है। (वी)
श्रृंखला-रेडिकलों के सक्रियता खो देने एवं स्थिर पॉलिमर अणुओं के निर्माण होने की प्रक्रिया को “श्रृंखला-समापन अभिक्रिया” कहा जाता है। जब दो साइक्लिक रैडिकल आपस में मिलते हैं, तो उनका विघटन “कपलिंग टर्मिनेशन” एवं “डिवर्जेंट टर्मिनेशन” नामक तरीकों से होता है। (सही)
इस पोस्ट को अंतिम बार zhaozq2015 द्वारा 2016-1-9 को 10:42 बजे संपादित किया गया।
सही------------------------------------
श्रृंखला-रेडिकलों के सक्रियता खो देने एवं स्थिर पॉलिमर अणुओं के निर्माण होने की प्रक्रिया को “श्रृंखला-समापन अभिक्रिया” कहा जाता है। जब दो साइक्लिक रैडिकल आपस में मिलते हैं, तो उनका विघटन “कपलिंग टर्मिनेशन” एवं “डिवर्जेंट टर्मिनेशन” नामक तरीकों से होता है। (सही)
श्रृंखला-रेडिकलों के सक्रियता खो देने एवं स्थिर पॉलिमर अणुओं के निर्माण होने की प्रक्रिया को “श्रृंखला-समापन अभिक्रिया” कहा जाता है। जब दो साइक्लिक रैडिकल आपस में मिलते हैं, तो उनका विघटन “कपलिंग टर्मिनेशन” एवं “डिवर्जेंट टर्मिनेशन” नामक तरीकों से होता है। (वी)