रसायन विज्ञानी, तुम्हारा छोटा सा सौभाग्य कौन है?
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छोटी सी खुशकिस्मती – बाई जिंगचेनमैं सुन पा रही हूँ, बारिश की बूँदें हरे-भरे मैदान पर गिर रही हैं… मैं सुन पा रही हूँ, दूर से क्लास खत्म होने की घंटियों की आवाज़… लेकिन मैं तुम्हारी आवाज़ नहीं सुन पा रही हूँ।
जब मैं तुमसे प्यार करने लगी, तब मुझे प्यार का अर्थ ही नहीं पता था… जब हम अलग हुए, तब ही मुझे इसका अहसास हुआ।
क्यों मुझे यह एहसास ही नहीं हुआ कि तुमसे मिलना ही जीवन की सबसे बड़ी खुशकिस्मती है?
शायद उस समय मैं मुस्कुराने एवं रोने में ही व्यस्त थी… आकाश में उड़ने वाले उल्कापिंडों का पीछा करने में ही व्यस्त थी… लोग तो यह ही भूल जाते हैं कि वह कौन है, जो हमेशा ही वहीं खड़ा रहकर हमारी रक्षा करता है…
दरअसल, तुम ही मेरी सबसे बड़ी खुशकिस्मती हो… हमारा प्यार तो बहुत ही निकट था… वह फैसला, जो तुमने मेरे लिए लिया… वह बारिश, जो तुमने मेरे लिए झेली… ये सब कुछ तो तुम्हारे कारण ही हुआ… तुम्हारा निष्कलंक प्यार…
तुमसे मिलना वाकई बहुत ही खुशकिस्मती की बात है… लेकिन अब मुझे तुम्हारे लिए रोने का अधिकार ही नहीं है…
उम्मीद है, उस जगह, जहाँ मैं नहीं देख सकती, तुम अपने पंख फैलाकर उड़ जाओगे… जिसे तुमसे मिलने का भाग्य है, वह कितनी खुशकिस्मत होगी…