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रूस के यूरोपीय हिस्से में तेल उत्पादन में कोई खास बदलाव नहीं होगा। आने वाले समय में रूस में कच्चे तेल के उत्पादन में वृद्धि हेतु प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी साइबेरिया, पूर्वी साइबेरिया एवं दूर-पूर्वी क्षेत्र होंगे। रूसी एवं विदेशी संस्थानों के अनुमानों के अनुसार, 2010 तक रूस का कच्चे तेल का उत्पादन 5.0×108 टन/वर्ष से 5.5×108 टन/वर्ष तक हो सकता है। दूसरे शब्दों में, 2004 के उत्पादन स्तर की तुलना में और 5000×104 टन/वर्ष से 10000×104 टन/वर्ष तक अतिरिक्त उत्पादन हो सकता है। पश्चिमी साइबेरिया क्षेत्र में उत्पादन में कम से कम 5000×104 टन/वर्ष की वृद्धि हो सकती है। पूर्वी साइबेरिया में, यदि आवश्यक धन एवं मानव संसाधन उपलब्ध रहें, तो नए खोजे गए तेल क्षेत्रों से 3000×104 टन/वर्ष (या उससे भी अधिक) का उत्पादन हो सकता है। चूँकि रूस में तेल की मांग एवं कच्चे तेल के प्रसंस्करण की क्षमता लगभग स्थिर ही बनी हुई है, इसलिए आने वाले समय में उत्पन्न होने वाला अतिरिक्त तेल निर्यात हेतु उपयोग में आ सकेगा। ऐसे में, 2010 तक रूस की कच्चे तेल के निर्यात क्षमता में लगभग 8000×10^4 टन/वर्ष की वृद्धि होने की उम्मीद है। यदि पूर्वी साइबेरिया में स्थित कुयुम्बिन एवं याराकोकिन नामक दो तेल क्षेत्रों से होने वाले उत्पादन को भी ध्यान में लिया जाए (जिसकी पुष्टि आवश्यक है), तो इन क्षेत्रों की निर्यात क्षमता और भी अधिक हो जाएगी।
रूस का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, एवं वहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। रूस तेल निर्यातक देश भी है। इन संसाधनों का सही उपयोग हमारे देश के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र के लिए बहुत ही लाभदायक साबित होगा।