प्रसव के बाद क्या खाना चाहिए? 5 स्वस्थ व्यंजनों की सिफारिशें
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प्रसव के बाद पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। न केवल पहले खर्च हुई ऊर्जा की भरपाई करनी आवश्यक है, बल्कि छोटे बच्चे की देखभाल एवं स्तनपान हेतु अतिरिक्त ऊर्जा भी आवश्यक है। पारंपरिक तरीकों के आधार पर ही “पौष्टिक आहार” लेना उचित नहीं है; अतिरिक्त या कम आहार लेने से गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं! आइए, चलिए हमारे साथ जानते हैं कि प्रसवोत्तर अवधि में कैसा भोजन करना उचित है। प्रसवोत्तर अवधि में क्या खाना चाहिए – प्रसवोत्तर आहार सूची1. पहले दिन (तिल का तेल)
सामग्री: अजवाइन – 3-5 ग्राम, सूअर का हृदय – आधा। विधि: सूअर के हृदय को अच्छी तरह धोने के बाद, उसमें नमक, अदरक एवं आंवला मिलाकर लगभग 2 घंटे तक भाप में पकाएं। इससे प्रसूता को रक्तस्राव कम होने में मदद मिलती है। आहार में फाइबर युक्त सब्जियाँ खानी चाहिए; दालों से बने उत्पाद नहीं खाने चाहिए, क्योंकि इनसे पेट में गैस बन सकती है। पहले सप्ताह में आंतरिक अंगों पर ही ध्यान दिया जाता है; इससे महिला को रक्तस्राव कम करने एवं दूध उत्पन्न करने में म 2. दूसरे दिन (तिल का तेल एवं सूअर का जिगर)
आवश्यक सामग्री: सूअर का जिगर, 3-5 ग्राम अडुलसी; साथ ही गाजर, शतावरी, लेट्यूस – इनमें से कोई भी एक सब्जी साथ में डाली जा सकती है। विधि: 3 ग्राम अश्वगंधा को 500 ग्राम पानी में डालकर लगभग 150 मिलीलीटर तरल पदार्थ तैयार करें। इसमें सूअर का जिगर डालें; इसे भूनकर या सूप बनाकर भी खाया जा सकता है। अंत में इसमें थोड़ा तिल का तेल डालें। पहले सप्ताह में मुख्य भोजन के रूप में “अष्टबलि दलिया” ही खाया जाएगा।
**तैयारी की विधि:** 1 ग्राम यीरेन, 1 ग्राम काला तिल, 1 ग्राम सूरजमुखी के बीज, 20 खुबानी, 3 ग्राम लाल छिलके वाले मूंगफली, 4 ग्राम लाल चीनी के फल, 50 ग्राम भूरा चावल, 50 ग्राम चिकना चावल, 3 ग्राम अखरोट (2 ग्राम यिन-चावल उपयुक्त है)। इन सभी सामग्रियों को मिलाकर दलिया बनाया जाए। उपयोग: अशुद्धियों को बाहर निकालना, शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाना, पाचन शक्ति को मजबूत करना, दूध उत्पन्न करना, अन्य मुख्य खाद्य पदार्थों में शामिल हैं – समुद्री शैवाल वाला दलिया, अंडे वाला दलिया, चिकन के टुकड़ों वाला दलिया, किशमिश वाला दलिया, मछली के टुकड़ों वाला दलिया, तथा कम चर्बी वाला मांस वाला दलिया। (किसी भी दलिये में कच्चे सूरजमुखी के बीज एवं कच्चा काला तिल भी मिलाया 3. तीसरा दिन (पेट के मांस का सूप)
आवश्यक सामग्री: सूअर का पेट – 250 ग्राम, डैंगशेन – 3-5 ग्राम, सन्फ्रूट – 2 टुकड़े, लाल छिलके वाले मूंगफली – 50 ग्राम या कमल के बीज – 50 ग्राम, अदरक – 2 ग्राम, पीली शराब – 2 ग्राम। विधि: सूअर का पेट अच्छी तरह धोकर उसे बारीक टुकड़ों में काट लें। इन टुकड़ों को पानी में उबालें, फिर इसे एक सिरेमिक बर्तन में 1000 मिलीलीटर पानी के साथ डालकर सूप बनाएं। इस सूप को, उसके अवशेषों सहित, ह उपयोग: (गर्भाशय को संकुचित करने, वजन कम करने, दूध उत्पन्न करने में सहायक।) नोट: प्रसूति के 8 सप्ताह के भीतर महिलाएँ 4-6 सूअर के पेट खा सकती हैं। 4. चौथा दिन (कमर के हिस्से का सूप)
सामग्री: डूजोंग – 10 ग्राम, कमर के हिस्से का मांस – 250–400 ग्राम, सिरका – 10 ग्राम, अदरक – 10 ग्राम, चीनी, झाइफ़ुंग – 2 ग्राम। विधि: किडनी के मांस को अच्छी तरह धो लें। इसमें डूज़ोंग आदि सामग्रियाँ मिलाकर 1000 मिलीलीटर पानी डालकर उबालें। डूज़ोंग एवं अन्य सामग्रियों को पहले 30 मिनट तक उबालें, उसके बाद ही किडनी का मांस डालें। उपयोग: (कमर दर्द एवं विभिन्न जोड़ों के दर्द में राहत देता है।) (पुरुषों के लिए उत्तेजक नुस्खा: http://jyz.zheyangai.com/zxyd/21902.html)
5. पाँचवाँ दिन (कद्दू एवं रिब्स का सूप)
आवश्यक सामग्री: 500 ग्राम रिब्स, 10 ग्राम डैंगशेन, 500 ग्राम कद्दू। विधि: रिब्स को पानी में डालकर उसमें डैंगशेन मिलाएं, फिर 1000 मिलीलीटर पानी डालकर उबालें। जब खाना लगभग तैयार हो जाए, तब उसमें डोंगगुआ डाल दें प्रसव के 7 दिनों तक, ऊपर बताए गए आहारों को बारी-बारी से खाया जा सकता है। ध्यान दें: ब्राउन शुगर, चावल की शराब, कार्प मछली, चिकन सूप आदि खाने से परहेज करें। जब बच्चे में पीलिया होता है, तो माँ को सूजन होती है; ऐसी स्थिति में भी ऐसी चीजें खाने से परहेज करना आ