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इस पोस्ट को अंतिम बार 328104062 द्वारा 2016-4-27 22:38 पर संपादित किया गया। बड़ी पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में, केंद्रीय नियंत्रण कक्ष, उत्पादन भवन, कार्यालय भवन, परीक्षण कक्ष, विद्युत रूपांतरण कक्ष, मापन उपकरणों हेतु केबिन आदि सभी में केंद्रीय एयर कंडीशनिंग प्रणाली ही उपयोग में आती है। 1. ऊपर बताए गए स्थानों में से, कौन-कौन से स्थानों में ठंडक/गर्मी प्रदान करने हेतु एयर कंडीशनर का उपयोग किया जा सकता है? क्या मापन उपकरणों हेतु केबिनों में जरूर ही विद्युत चालित एयर कंडीशनर ही आवश्यक है? 2. यदि गर्म पानी तैयार करने हेतु शीतलन प्रणाली का उपयोग किया जाए, तो जल आपूर्ति/निकासी संबंधी कार्यों एवं वायु/ताप नियंत्रण संबंधी कार्यों में आम तौर पर कैसा विभाजन होता है? 3. मुझे प्रक्रिया-पीआईडी चार्ट में शीतलन हेतु पानी का उल्लेख मिला; वास्तव में यह पानी 35KV ट्रांसफॉर्मर रूम में उपयोग हो रहा है। लेकिन जल-आपूर्ति संबंधी विवरणों में पाइपलाइनों का मार्ग दर्शाया ही नहीं गया है, एवं विद्युत विभाग द्वारा भी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है। क्या इसका डिज़ाइन जल-आपूर्ति विभाग द्वारा किया जाना चाहिए, या वायु-ऊष्मा नियंत्रण विभाग द्वारा? 4. डिज़ाइन इंस्टीट्यूटों में, वेंटिलेशन एवं हीटिंग संबंधी कार्यों का डिज़ाइन करने का दायरा क्या कौन-से चित्र/ड्राइंग, वेंटिलेशन एवं हीटिंग संबंधी विशेषज्ञों द्व ? ?
हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर-कंडीशनिंग = HVAC। HVAC, हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर-कंडीशनिंग का संक्षिप्त रूप है; इसका अर्थ है ऊष्मा प्रदान करना, वायु का संचालन करना एवं वायु को नियंत्रित करना। 2. हीटिंग (Heating) – किसी निश्चित कमरे या क्षेत्र में मौजूद हवा को गर्म करना, या वेंटिलेशन हेतु उपयोग में आने वाली हवा को गर्म करना। 3. वेंटिलेशन (Ventilation) – किसी निर्धारित कमरे या क्षेत्र में हवा का आदान-प्रदान करके वहाँ के वायु-दबाव को नियंत्रित किया जाता है, एवं अतिरिक्त गर्मी को भी दूर किया जाता है। 4. एयर-कंडीशनिंग – किसी विशेष स्थान के तापमान, आर्द्रता एवं दबाव को नियंत्रित करने हेतु प्रयोग में आता है; ताकि वहाँ की परिस्थितियाँ उत्पादन प्रक्रियाओं एवं मनुष्यों की सुविधाओं के अनुरूप रहें। 5. प्राकृतिक वेंटिलेशन (Nature Ventilation) – इसमें कमरे के अंदर एवं बाहर की हवा के घनत्व में अंतर के कारण उत्पन्न होने वाले तापीय दबाव या हवा के दबाव का उपयोग करके हवा के प्रवाह को बढ़ाकर वेंटिलेशन किया जाता है। 6. यांत्रिक वेंटिलेशन (Mechanical Ventilation) – पंखे या कंप्रेसरों के माध्यम से होने वाली जबरदस्ती वायु-प्रवाह प्रक्रिया। 7. ताज़ी हवा (Fresh Air) – यह सुरक्षित क्षेत्रों के बाहर से आने वाली हवा है। 8. संसाधित वायु (Conditioned Air), वह वायु है जिसे फिल्टर करने, गर्म/ठंडा करने, नमी जोड़ने या हटाने के बाद, वांछित मानकों के अनुरूप बनाया जाता है। 9. वायु आपूर्ति (Supply Air): हवा को किसी विशेष क्षेत्र में पहुँचाने हेतु वेंटिलेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। 10. रिटर्न एयर (Return Air) – वह हवा जो किसी क्षेत्र से बाहर निकलकर पुनः वेंटिलेशन प्रणाली में वापस आ जाती है। 11. वायु परिवर्तन की संख्या (Air Changes): इसका अर्थ है, वेंटिलेशन क्षेत्र में प्रति घंटे बदलने वाली हवा की मात्रा, जो उस क्षेत्र की कुल आयतन के गुणक के बराबर होती है। 12. खतरनाक क्षेत्र (Hazardous Areas) – वे क्षेत्र हैं, जहाँ आग या विस्फोट होने की संभावना होती है। आम तौर पर, इसे तीन क्षेत्रों में विभाजित क 1) श्रेणी 0 क्षेत्र, वह क्षेत्र है जहाँ सामान्य संचालन परिस्थितियों में, लगातार ऐसी ज्वलनशील गैसें या भाप मौजूद रहती हैं, जिनकी सांद्रता आग लगने या विस्फोट होने हेतु पर्याप्त होती है। 2) श्रेणी 1 क्षेत्र, वह क्षेत्र है जहाँ सामान्य संचालन परिस्थितियों में, आवधिक रूप से या बार-बार, ऐसी ज्वलनशील गैसें या भाप उत्पन्न होती हैं, जिनकी सांद्रता दहन या विस्फोट हेतु पर्याप्त होती है। 3) श्रेणी 2 क्षेत्रों में, सामान्य संचालन परिस्थितियों में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना नहीं होती, जिसमें दहन या विस्फोट होने हेतु आवश्यक सांद्रता वाली ज्वलनशील गैसें/भापें उत्पन्न हों। लेकिन असामान्य संचालन परिस्थितियों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
जिन 3 डिज़ाइन कंपनियों से मुलाकात हुई, वे सभी “हीटिंग एंड वेंटिलेशन” क्षेत्र से संबं
वह शीतलन उपकरण तो विशेष प्रकार के कार्यों हेतु ही उपयोग में आता होगा।